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Showing posts from June, 2020

janmashtami:lordkrishna

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Janmashtami of lord krishna

Kabir saheb parkar diwas not jayanti

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Kabir saheb parkat diwas not jayanti   Rigved mandal 9, sukt 96 mantra 17 says that supreme god kabir never takes birth he comes from satlok directly in form of a child and he doesn't die. He go to satlok with body  That's why prakat diwas is celebrated instead of kabir jayanti

Deep knowledge of god kabir

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Deep   knowledge of god kabir पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब ने हमें बताया कि गीता जी का ज्ञान श्री कृष्ण जी ने नहीं दिया गीता जी का ज्ञान ज्योति निरंजन (काल) ने दिया है

DivinePlayOfGodKabir

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Garibdasji's katha            आदरणीय गरीबदास साहेब जी का आर्विभाव सन् 1717 में हुआ तथा साहेब कबीर जी के दर्शन दस वर्ष की आयु में सन् 1727 में नला नामक खेत में हुए तथा सत्लोक वास सन् 1778 में हुआ। आदरणीय गरीबदास साहेब जी को भी परमात्मा कबीर साहेब जी सशरीर जिंदा रूप में मिले। आदरणीय गरीबदास साहेब जी अपने नला नामक खेतों में अन्य साथी ग्वालों के साथ गाय चरा रहे थे। जो खेत कबलाना गाँव की सीमा से सटा है। ग्वालों ने जिन्दा महात्मा के रूप में प्रकट कबीर परमेश्वर से आग्रह किया कि आप खाना नहीं खाते हो तो दूध ग्रहण करो क्योंकि परमात्मा ने कहा था कि मैं अपने सतलोक गाँव से खाना खाकर आया हूँ। तब परमेश्वर कबीर जी ने कहा कि मैं कुँआरी गाय का दूध पीता हूँ। बालक गरीबदास जी ने एक कुँआरी गाय को परमेश्वर कबीर जी के पास लाकर कहा कि बाबा जी यह बिना ब्याई (कुँआरी) गाय कैसे दूध दे सकती है ? तब कविर्देव (कबीर परमेश्वर) ने कुँआरी गाय अर्थात् बच्छिया की कमर पर हाथ रखा, अपने आप कुँआरी गाय (अध्नया धेनु) के थनों से दूध निकलने लगा। पात्र भरने पर रूक गया। वह दूध परमेश्वर कबीर जी ने पीया तथ...

कबीर जी द्वारा काशी में भंडारा करना।

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कबीर जी द्वारा काशी में भंडारा करना शेखतकी ने कबीर परमेश्वर के नाम झूठि चिट्टी लिख दी कि कबीर साहेब भंडारा कर रहे है और भंडारे के साथ एक दोहर (10 ग्राम सोना) तथा एक मोहर (कीमती सूती शोल) प्रत्येक व्यक्ति को मिलेगी। यह चिठ्ठी सभी संत महंतो के पास भेज दी। निश्चित दिन को सुबह-सुबह सभी साधु संत महंत आ गए फिर  कबीर साहेब जी को संत रविदास जी ने बताया की 18 लाख व्यक्ति अपने द्वार पर भोजन खाने के लिए आ गए हैं कबीर साहेब ने कहा कि रविदास दरवाजा बंद कर ले अपने आप चले जायेंगे फिर कबीर साहेब अपने सतलोक पहुंचे और वहां से 900000 बैलों के ऊपर सर्व सामान दोहर मोहर रखकर काशी के चौपड़ के बाजार में आकर तंबू लगा दिए और सर्व साधु संतों महंतों को भोजन करवाया और साथ में एक दोहर एक मोहर भी दी।