कबीर जी द्वारा काशी में भंडारा करना
शेखतकी ने कबीर परमेश्वर के नाम झूठि चिट्टी लिख दी कि कबीर साहेब भंडारा कर रहे है और भंडारे के साथ एक दोहर (10 ग्राम सोना) तथा एक मोहर (कीमती सूती शोल) प्रत्येक व्यक्ति को मिलेगी। यह चिठ्ठी सभी संत महंतो के पास भेज दी। निश्चित दिन को सुबह-सुबह सभी साधु संत महंत आ गए फिर कबीर साहेब जी को संत रविदास जी ने बताया की 18 लाख व्यक्ति अपने द्वार पर भोजन खाने के लिए आ गए हैं कबीर साहेब ने कहा कि रविदास दरवाजा बंद कर ले अपने आप चले जायेंगे फिर कबीर साहेब अपने सतलोक पहुंचे और वहां से 900000 बैलों के ऊपर सर्व सामान दोहर मोहर रखकर काशी के चौपड़ के बाजार में आकर तंबू लगा दिए और सर्व साधु संतों महंतों को भोजन करवाया और साथ में एक दोहर एक मोहर भी दी।
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